ढूंढ रहा हूँ बचपन के वो दिन कहाँ गए
वो बहते पानी में मेरे नाव के कारोबार कहा गये
वो हस्ते खेलते लम्हो के मेरे यार कहाँ गए
ढूंढ रहा हूँ बचपन के वो दिन कहाँ गए
वो स्कुल ना जाने के बहाने,
वो बिना टेंशन रहने के , खेलने कूदने और फिर
सो जाने के, वो सुकून के पल कहा गए
ढूंढ रहा हूँ बचपन के वो दिन कहाँ गए...!
-अभिषेक नेमा